नया माउस खरीदने से पहले क्या जानें? DPI, प्रकार और जरूरी बातें
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| नया माउस खरीदने से पहले DPI, प्रकार और फीचर समझें |
नया माउस खरीदने से पहले ये बातें जरूर जान लें
नमस्कार मित्रों, आज बात करते हैं एक ऐसी चीज़ की जिसे हम रोज़ इस्तेमाल करते हैं लेकिन खरीदते समय उस पर ज़्यादा ध्यान नहीं देते – कंप्यूटर माउस।
अक्सर लोग दुकान पर जाते हैं और सबसे सस्ता या सबसे दिखने में अच्छा माउस उठा लेते हैं। लेकिन कुछ दिनों बाद वही माउस हाथ में दर्द देता है, क्लिक ठीक से काम नहीं करता या फिर बहुत धीमा या बहुत तेज़ चलने लगता है।
इसलिए नया माउस खरीदने से पहले कुछ जरूरी बातें जान लेना समझदारी है।
1. माउस का प्रकार समझें
आज बाजार में मुख्य रूप से तीन तरह के माउस मिलते हैं:
- वायर्ड माउस – केबल से जुड़ा रहता है। गेमिंग और ऑफिस के लिए स्थिर और भरोसेमंद।
- वायरलेस माउस – USB डोंगल या Bluetooth से चलता है। कम तार, ज्यादा सुविधा।
- ब्लूटूथ माउस – अलग से रिसीवर की जरूरत नहीं, सीधे लैपटॉप से कनेक्ट हो जाता है।
अगर आप गेमिंग करते हैं तो वायर्ड या लो-लेटेंसी वायरलेस माउस बेहतर रहेगा। सामान्य ऑफिस काम के लिए कोई भी अच्छा ब्रांड ठीक रहेगा।
2. DPI क्या है और क्यों जरूरी है?
DPI का मतलब है “Dots Per Inch”। आसान भाषा में समझें तो माउस की संवेदनशीलता।
कम DPI मतलब कर्सर धीरे चलेगा। ज्यादा DPI मतलब कर्सर तेज़ चलेगा।
- साधारण काम के लिए 800–1600 DPI काफी है।
- गेमिंग के लिए 2400 DPI या उससे ज्यादा विकल्प अच्छा रहता है।
आजकल कई माउस में DPI बदलने का बटन भी आता है, जो काम की चीज़ है।
3. ऑप्टिकल या लेज़र?
- ऑप्टिकल माउस – सामान्य उपयोग के लिए अच्छा और किफायती।
- लेज़र माउस – ज्यादा सटीक, ग्लास जैसी सतह पर भी काम कर सकता है।
घर या ऑफिस के लिए ऑप्टिकल माउस पर्याप्त है। प्रोफेशनल डिजाइन या गेमिंग के लिए बेहतर सेंसर देखें।
4. आराम (Ergonomics) को नजरअंदाज न करें
अगर आप रोज़ 4–8 घंटे कंप्यूटर पर काम करते हैं तो माउस का आकार और पकड़ बहुत मायने रखती है।
- हाथ में फिट बैठना चाहिए।
- बहुत छोटा या बहुत बड़ा नहीं होना चाहिए।
- लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर कलाई में दर्द नहीं होना चाहिए।
कुछ माउस खासतौर पर एर्गोनॉमिक डिजाइन में आते हैं जो हाथ के प्राकृतिक आकार के अनुसार बने होते हैं।
5. बटन और फीचर
साधारण माउस में 2 बटन और एक स्क्रॉल व्हील होता है।
लेकिन आजकल कई माउस में अतिरिक्त बटन मिलते हैं:
- Back / Forward बटन
- DPI कंट्रोल बटन
- Programmable बटन (गेमिंग के लिए)
जरूरत के हिसाब से फीचर चुनें, दिखावे के चक्कर में ज्यादा बटन वाला माउस लेने की जरूरत नहीं।
6. बैटरी लाइफ (वायरलेस माउस के लिए)
अगर वायरलेस माउस ले रहे हैं तो ये देखें:
- बैटरी कितने समय चलती है
- रीचार्जेबल है या सेल से चलता है
- ऑटो स्लीप मोड है या नहीं
लंबी बैटरी लाइफ वाला माउस बेहतर रहता है।
7. ब्रांड और वारंटी
बहुत सस्ता और बिना ब्रांड का माउस जल्दी खराब हो सकता है।
विश्वसनीय ब्रांड लें और कम से कम 1 साल की वारंटी जरूर देखें।
8. आपका उपयोग क्या है?
- सिर्फ ब्राउज़िंग और ऑफिस काम – साधारण माउस ठीक।
- डिजाइनिंग – हाई DPI और सटीक सेंसर जरूरी।
- गेमिंग – बेहतर सेंसर, ज्यादा DPI और मजबूत क्लिक वाला माउस लें।
अंत में एक जरूरी बात
माउस छोटा उपकरण जरूर है, लेकिन काम का सबसे अहम हिस्सा है। गलत माउस लेने से काम धीमा, असुविधाजनक और थकाने वाला हो सकता है।
इसलिए अगली बार नया माउस खरीदते समय सिर्फ कीमत मत देखें, अपने काम और सुविधा को प्राथमिकता दें।

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (23-09-2018) को "चाहिए पूरा हिन्दुस्तान" (चर्चा अंक-3103) पर भी होगी।
जवाब देंहटाएं--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
बहुत ही अच्छी जानकारी
जवाब देंहटाएंvery nyc ifo, i like it.
जवाब देंहटाएंयह जानकारी कई लोगों के काम आएगी। आभार।
जवाब देंहटाएंvery useful for all
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