AI से स्पैम कॉल रुकेंगी? TRAI के नए नियम क्या हैं और यूज़र पर क्या असर होगा (2026)
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| TRAI द्वारा 2026 तक AI आधारित सिस्टम से स्पैम कॉल रोकने की तैयारी |
AI से स्पैम कॉल रुकेंगी? TRAI के नए प्रस्तावित नियम क्या हैं और आपको क्या जानना चाहिए
नोट: यह लेख उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है और नियम लागू होने तक इनमें बदलाव संभव है।
नमस्कार मित्रों,
अगर आपके फोन पर रोज़ अनजान नंबर से लोन, इंश्योरेंस, क्रेडिट कार्ड या ट्रेडिंग कॉल आती है, तो आप अकेले नहीं हैं। स्पैम कॉल आज देश की बड़ी डिजिटल समस्या बन चुकी है।
अब खबर है कि TRAI स्पैम कॉल रोकने के लिए AI आधारित सिस्टम लाने की तैयारी में है। सवाल यह है कि क्या सच में इससे फर्क पड़ेगा? आइए समझते हैं।
पहले समस्या समझें
स्पैम कॉल रोकने के लिए पहले भी नियम बने थे। DND सेवा, शिकायत प्रणाली और नंबर ब्लॉकिंग जैसे उपाय मौजूद हैं। फिर भी समस्या खत्म नहीं हुई।
कारण साफ है — कॉल करने वाले लगातार नंबर बदलते रहते हैं, फर्जी पहचान का उपयोग करते हैं और तकनीकी loopholes का फायदा उठाते हैं।
TRAI क्या नया प्रस्तावित कर रहा है?
रिपोर्ट के अनुसार, AI आधारित टूल की मदद से कॉल पैटर्न का विश्लेषण किया जाएगा। यानी:
- एक नंबर कितने लोगों को कितनी बार कॉल कर रहा है
- कॉल की अवधि क्या है
- क्या नंबर bulk calling के संकेत दे रहा है
- क्या पहले उसके खिलाफ शिकायतें दर्ज हैं
इन संकेतों के आधार पर संदिग्ध नंबरों की पहचान की जाएगी और संभवतः उन्हें स्वतः ब्लॉक या चिन्हित किया जा सकता है।
AI इसमें कैसे मदद करेगा?
AI का काम पैटर्न पहचानना है। अगर कोई नंबर हजारों लोगों को एक जैसे समय पर कॉल कर रहा है, तो सिस्टम उसे असामान्य गतिविधि मान सकता है।
यानी शिकायत का इंतजार करने की बजाय सिस्टम खुद पहचानने की कोशिश करेगा।
क्या इससे स्पैम कॉल पूरी तरह बंद हो जाएंगी?
सीधी बात - पूरी तरह खत्म होना मुश्किल है।
लेकिन:
- Bulk स्पैम कॉल कम हो सकती हैं
- फर्जी टेलीमार्केटिंग नेटवर्क पकड़ में आ सकते हैं
- यूज़र को पहले से चेतावनी मिल सकती है
क्या असली कॉल भी ब्लॉक हो सकती हैं?
यह एक महत्वपूर्ण सवाल है। AI सिस्टम कभी-कभी गलत पहचान भी कर सकता है।
संभव है कि कोई वैध बिजनेस कॉल भी संदिग्ध मान ली जाए। इसलिए अंतिम निर्णय प्रक्रिया में मानवीय निगरानी जरूरी होगी।
Truecaller जैसे ऐप्स पर क्या असर पड़ेगा?
अगर टेलीकॉम स्तर पर AI फिल्टरिंग मजबूत हो जाती है, तो थर्ड-पार्टी कॉलर पहचान ऐप्स की जरूरत कम हो सकती है।
लेकिन अभी यह कहना जल्दबाज़ी होगी।
डेटा प्राइवेसी का क्या?
AI आधारित निगरानी का मतलब कॉल पैटर्न का विश्लेषण। यहाँ सवाल उठता है कि क्या यूज़र डेटा सुरक्षित रहेगा?
यदि सिस्टम केवल पैटर्न देखे और कॉल की सामग्री नहीं, तो प्राइवेसी जोखिम सीमित रहेगा। लेकिन पारदर्शिता जरूरी है।
आपको अभी क्या करना चाहिए?
- DND सक्रिय रखें
- अनजान नंबर से OTP साझा न करें
- संदिग्ध कॉल की शिकायत करें
- फर्जी KYC कॉल से सावधान रहें
अंत में एक जरूरी बात
AI एक मजबूत तकनीक है, लेकिन कोई जादू नहीं। स्पैम कॉल की समस्या तकनीकी और व्यवहारिक दोनों है। नियम आएंगे, सिस्टम मजबूत होगा, लेकिन जागरूकता अभी भी सबसे बड़ा हथियार है।
तकनीक पर भरोसा रखें, लेकिन सतर्क रहना न छोड़ें।

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